Saturday, 1 October 2016

गुजारिश !!

हर बात में मायने मत ढूंडो,
कुझ बात बेमायने रहने दो |

हर जाम में नशा नहीं होता ,
किसी आँख में पैमाने रहने दो |

हर प्यार में वफ़ा नहीं होती ,
बेवफाई के तराने रहने दो |

वक़्त बदलता है , इंसान भी ,
कहीं किसी इक पल में जमाने रहने दो |

कुझ यार नए मिलादो ,
कुझ यार पुराने रहने दो |

कुझ नए दांव भी सीखने हैं ,
कुझ हथियार पुराने रहने दो |

कुझ पल तो जी लो इस पल में ,
कुझ  याद पुराने रहने दो |

हर मर्ज की दवा करदो ऐ "साकी" ,
कुझ दर्द पुराने रहने दो |

हर बात में मायने मत ढूंडो,
कुझ बात बेमायने रहने दो |

हर जाम में नशा नहीं होता ,-
किसी आँख में पैमाने रहने दो |

                                                                                   ---इक़बाल साकी