Tuesday, 26 November 2013

मुक्कदर के सिकंदर

यूँ कहने को तो दुनिया में ,
समंदर हैं बड़े बड़े ,
पर पीने के लिए मुझको ,
दो बूँद पानी ना  मिला |

यूँ मैखाने लोग पीने जाते हैं ,
बड़े शोंक से ,
गम भुलाने के लिए,मुझको ,
कोई जाम खाली ना मिला |

मुक्कदर के सिकंदर तो ,
कहते हैं लोग हमें ,
पर हम  जो चाहते थे ,
हमें वो मुकाम न मिला |

मेरी मौत की दुआ मांगने वालो ,
मर चूका हूँ मैं ,
क्या करूँ इस किस्मत का ,
जो तुम्हें पैगाम ना मिला |

                              इक़बाल साकी 

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