Tuesday, 23 December 2014

दिन भी गुजरें , ख्वाब हों जैसे !!

दिन भी गुजरे , ख्वाब हों जैसे ,

उड़ते जाएं हवा के संग,
ख्याल मेरे , उकाब हों जैसे |

चला जाऊं, अनजानी राहों पे ,
ढूंढ़ता कोई जवाब हों जैसे |

तेरी आवाज़ के  हम हो गए , इस कदर दीवाने ,
महंगी कोई शराब हो जैसे |

मेरे आंसुओं का कोई हिसाब ना रहा ,
बहते हुए चेनाब हों जैसे |

बिखरना चाहता  हूँ , राहों में उनकी ,
बिखरे हुए गुलाब हों जैसे |

दिन भी गुजरें , ख्वाब हों जैसे !!

                                                                     आमीन !!
                                                                   ईकबाल साकी 

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