दिन भी गुजरे , ख्वाब हों जैसे ,उड़ते जाएं हवा के संग,
ख्याल मेरे , उकाब हों जैसे |
चला जाऊं, अनजानी राहों पे ,
ढूंढ़ता कोई जवाब हों जैसे |
तेरी आवाज़ के हम हो गए , इस कदर दीवाने ,
महंगी कोई शराब हो जैसे |
मेरे आंसुओं का कोई हिसाब ना रहा ,
बहते हुए चेनाब हों जैसे |
बिखरना चाहता हूँ , राहों में उनकी ,
बिखरे हुए गुलाब हों जैसे |
दिन भी गुजरें , ख्वाब हों जैसे !!
आमीन !!
ईकबाल साकी
Wahhhh!! Bohut Khoob
ReplyDeleteDhanwaad veere
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